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लंबे राजनीतिक संघर्ष और मुखर तेवरों का मिला फल: गौरीशंकर श्रीवास बने केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपने आक्रामक तेवर और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले भाजपा प्रदेश प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास को सरकार ने एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें ‘छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड’ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, साथ ही उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा भी दिया गया है।
विपक्षी संघर्ष की रही है लंबी गाथा
गौरीशंकर श्रीवास का राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है। विपक्ष में रहते हुए उन्होंने तत्कालीन सत्ता के खिलाफ सड़क से लेकर मीडिया डिबेट तक जमकर मोर्चा संभाला। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता के रूप में उन्होंने न केवल विपक्ष की भूमिका को मजबूती से निभाया, बल्कि राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कई मौकों पर उन्हें अपनी मुखरता के कारण कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन वे अपने सिद्धांतों और पार्टी की विचारधारा पर अडिग रहे।
पद की गरिमा और भविष्य की चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि श्रीवास की यह नियुक्ति महज एक पद नहीं, बल्कि उनके वर्षों के राजनीतिक संघर्ष और पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतिफल है। बतौर केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष, अब उनके सामने मुख्य चुनौती समाज के उत्थान की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने की होगी। विपक्ष में रहकर सरकार की कमियां गिनाने वाले श्रीवास के लिए अब सत्ता में रहकर अपनी कार्यकुशलता साबित करने की बारी है।
संगठन में उत्साह
उनकी इस नियुक्ति से भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ है। समर्थकों का कहना है कि श्रीवास ने जिस तरह से विपक्ष में रहकर संघर्ष किया, उसी ऊर्जा के साथ वे केश शिल्पी समाज के विकास और उनके कल्याणकारी कार्यों को गति देंगे।
राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि वे अपनी नई भूमिका में समाज के हर वर्ग को साथ लेकर एक नई कार्यसंस्कृति स्थापित करेंगे।

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